नोएडा, उत्तर प्रदेश (UNA) : एक निजी अस्पताल में पिछले 12 वर्षों से वेजिटेटिव स्टेट में रह रहे 45 वर्षीय व्यक्ति के मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) पर विचार करने के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। परिजनों ने अदालत के निर्देशों के तहत इस विकल्प का मूल्यांकन कराने का अनुरोध किया है, जिसके बाद विशेषज्ञों की टीम मरीज की वर्तमान स्थिति, न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रियाओं और दीर्घकालिक उपचार संभावनाओं की जांच कर रही है।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि बोर्ड में न्यूरोलॉजी, क्रिटिकल केयर और मेडिकल एथिक्स के विशेषज्ञ शामिल हैं, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार स्थिति का आकलन कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट किया गया है कि मरीज कई वर्षों से किसी प्रकार की संज्ञानात्मक प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है और जीवन-निर्वाह उपकरणों पर निर्भर है।
रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि प्रक्रिया संवेदनशील और कानूनी रूप से जटिल है, इसलिए हर कदम अत्यंत सावधानी से उठाया जा रहा है। - UNA















