वॉशिंगटन (UNA) : – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना "दोस्त" बताया, लेकिन साथ ही भारत पर "बहुत ऊँचे" टैरिफ का आरोप लगाकर उसकी आलोचना भी की। उनका दावा है कि ये टैरिफ द्विपक्षीय व्यापार में बाधा डालते हैं। यह बयान अमेरिका-भारत संबंधों की जटिल प्रकृति को उजागर करता है।
व्यापारिक घर्षण और ट्रंप की टिप्पणी
यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच व्यापारिक घर्षण के बढ़ने के बाद आई है, जिसकी पहचान वॉशिंगटन द्वारा कुछ भारतीय वस्तुओं पर 25% तक टैरिफ लगाने की हालिया घोषणा से हुई है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी मेरे दोस्त हैं, लेकिन व्यापार के मामले में, वह हमारे साथ ज्यादा व्यापार नहीं करते क्योंकि टैरिफ बहुत ऊँचे हैं।" यह टिप्पणी उनके प्रशासन की शिकायत के मूल को रेखांकित करती है: भारत में अमेरिकी उत्पादों के लिए पारस्परिक बाजार पहुंच की कथित कमी।
यह बयान राष्ट्रपति ट्रंप की विदेश नीति के दृष्टिकोण की विशेषता है, जिसमें अक्सर विश्व नेताओं के साथ व्यक्तिगत तालमेल को कड़ी आर्थिक दबाव के साथ मिलाया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रति व्यक्तिगत गर्मजोशी व्यक्त करते हुए भी, राष्ट्रपति का व्यापार पर संदेश दृढ़ और उनके "अमेरिका फर्स्ट" एजेंडे के अनुरूप है।
GSP स्थिति की समाप्ति और भारत की प्रतिक्रिया
यह नवीनतम घटनाक्रम अमेरिका द्वारा जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) व्यापार कार्यक्रम के तहत भारत के लाभार्थी विकासशील राष्ट्र के दर्जे को समाप्त करने के तुरंत बाद आया है। GSP स्थिति ने अरबों डॉलर के भारतीय सामानों को अमेरिका में शुल्क-मुक्त प्रवेश की अनुमति दी थी। अमेरिकी प्रशासन ने इस वापसी का कारण भारत द्वारा "अपने बाजारों तक न्यायसंगत और उचित पहुंच प्रदान करने में विफलता" बताया।
जवाब में, भारत ने अमेरिकी कार्रवाई को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया है और यह कहा है कि वह इस मुद्दे को हल करने के लिए अमेरिका को एक प्रतिसंतुलनकारी व्यापार पैकेज (counterbalancing trade package) की पेशकश करने के लिए तैयार था। नई दिल्ली ने दो दर्जन से अधिक अमेरिकी उत्पादों, जिनमें बादाम, सेब और अखरोट शामिल हैं, पर प्रतिशोधात्मक टैरिफ की एक सूची भी तैयार की है, हालांकि एक राजनयिक समाधान तक पहुंचने की उम्मीद में उनके कार्यान्वयन को कई बार स्थगित कर दिया गया है।
भविष्य की राह
चूंकि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र इन आर्थिक मतभेदों को navigate करने का प्रयास कर रहे हैं, राष्ट्रपति ट्रंप की नवीनतम टिप्पणियां संकेत देती हैं कि व्यापार असंतुलन उनके व्हाइट हाउस के लिए एक शीर्ष प्राथमिकता बना हुआ है। पर्यवेक्षक अब यह देखने के लिए देख रहे हैं कि क्या दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत केमिस्ट्री इस विवाद को शांत कर सकती है या क्या टैरिफ का गतिरोध अमेरिका-भारत आर्थिक संबंधों को परिभाषित करना जारी रखेगा। - UNA