नई दिल्ली (UNA) : – संसद का मानसून सत्र शुरू होने के बाद से ही disruptions और uproar से प्रभावित रहा है।
राज्यसभा में हंगामा और भाजपा का पक्ष
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने सीधे तौर पर विपक्षी दलों को निशाना बनाया, उन पर सदन को काम नहीं करने देने का आरोप लगाया। नड्डा ने कहा कि विपक्ष राज्यसभा की कार्यवाही को बाधित कर रहा है और सरकार को विभिन्न मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दे रहा है।
विपक्ष सरकार के विभिन्न क्षेत्रों, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र भी शामिल है, में CISF कर्मियों को तैनात करने के फैसले का विरोध कर रहा है। विपक्ष का तर्क है कि यह कदम civilian workforce को militarize करने और राज्य सरकारों के अधिकारों पर अतिक्रमण करने का एक प्रयास है।
हालांकि, नड्डा ने सरकार के फैसले का बचाव किया और कहा कि देश के critical infrastructure की सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए CISF कर्मियों की तैनाती आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर सरकार के एजेंडे को पटरी से उतारने और महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने को रोकने के लिए हंगामा कर रहा है।
CISF की तैनाती और विपक्ष की मांग
राज्यसभा में हुए हंगामे के कारण सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा, जिससे महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने में देरी हुई और संसद के समग्र कामकाज पर असर पड़ा। विपक्षी दलों पर सदन की कार्यवाही को ठप करने और सरकार को विभिन्न मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं देने का आरोप लगाया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, विपक्ष ने CISF कर्मियों को Parliament House Complex के अंदर तैनात करने के फैसले पर आपत्ति जताई, जिसका जवाब गृह मंत्रालय ने दिया कि Parliament House की सुरक्षा के लिए Parliament Security Service (PSS) के तहत marshals को तैनात किया गया था, न कि CISF कर्मियों को। यह स्पष्टीकरण देने के बावजूद, विपक्ष ने अपनी विरोध जारी रखा और गृह मंत्री अमित शाह की ओर से एक विस्तृत बयान की मांग की।
संसद का मानसून सत्र जारी रहने के कारण, विपक्ष और सरकार से CISF कर्मियों की तैनाती सहित विभिन्न मुद्दों पर अपनी खींचतान जारी रखने की उम्मीद है।
हाल ही में गृह मंत्रालय ने CISF की स्वीकृत सीमा को मौजूदा 1.62 लाख से बढ़ाकर 2.20 लाख करने की मंजूरी दी है।