नई दिल्ली, भारत (UNA) : केंद्रीय Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) द्वारा 5 नवंबर 2025 को जारी की गई नई AI गवर्नेंस-गाइडलाइन में यह भाव प्रमुखता से दिखाई देता है कि भारत नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए AI नियमों को भारी बनाने से बचना चाहता है। गाइडलाइन में सात प्रमुख सिद्धांत रखे गए हैं — ट्रस्ट, पिपल-फर्स्ट अप्रोच, नवाचार के लिए प्रतिबंधों से पहले अवसर, न्याय व समानता, जवाबदेही, समझने योग्य डिज़ाइन, तथा सुरक्षा-और-सुदृढ़ता।
दस्तावेज़ में एक “लाइट-टच” नियामक ढाँचा प्रस्तावित है, जिसमें नए कानूनों के बजाय मौजूदा क़ानूनों और संयंत्रों का ही उपयोग करने की बात कही गई है। इसमें प्रस्तावित संस्थागत संरचना में शामिल हैं — एक AI गवर्नेंस ग्रुप (AIGG) नीति समन्वय के लिए, एक टेक्नोलॉजी व पॉलिसी एक्सपर्ट कमिटी (TPEC) तकनीकी इनपुट के लिए, तथा एक AI सेफ्टी इंस्टिट्यूट (AISI) जोखिम मूल्यांकन-मानक-निर्माण के लिए।
NASSCOM ने इस गाइडलाइन की स्थिति का समर्थन करते हुए कहा कि यह उनकी लंबे समय से की गई सलाह — “इस चरण पर अलग से AI-कानून की आवश्यकता नहीं” — का लगभग शब्दशः प्रतिबिंब है। यह संकेत देता है कि तकनीकी उद्योग को नए नियंत्रणों से रोके रखने की बजाय उन्हें समन्वित एवं सहयोगात्मक तरीके से चलाने का भरोसा दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दृष्टिकोण से भारत को तेजी से बदलते AI परिदृश्य में लचीलापन मिलेगा और नवोन्मेष को बढ़ावा मिलेगा, जबकि संभावित जोखिमों व सामाजिक चुनौतियों से निपटने की क्षमता भी बनी रहेगी। - UNA
07 Nov 25भारत के AI गवर्नेंस गाइडलाइन से सुझाया गया — नियंत्रण की बजाय समन्वय, नवाचार और जोखिम के संतुलन के लिए चुस्त रूपरेखा
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