ग्लोबल टैरिफ युद्ध के बीच ट्रंप ने किया उत्तराधिकारी का ऐलान, अमेरिका में मचा सियासी भूचाल06 Aug 25

ग्लोबल टैरिफ युद्ध के बीच ट्रंप ने किया उत्तराधिकारी का ऐलान, अमेरिका में मचा सियासी भूचाल

वॉशिंगटन डीसी (UNA) : – राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हफ्ते एक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया, जब उन्होंने अपने कार्यकाल के सिर्फ छह महीने बाद ही अपने उत्तराधिकारी के बारे में चौंकाने वाली टिप्पणी की। इस अभूतपूर्व कदम ने देश की राजधानी में हलचल मचा दी है, जिससे दोनों पार्टियों के सांसद राष्ट्रपति के इरादों की व्याख्या करने में जुट गए हैं।

यह टिप्पणी आयोवा के सेडर रैपिड्स में एक रैली के दौरान आई, जहां राष्ट्रपति अपने प्रशासन की बढ़ती आक्रामक व्यापार नीति का बचाव कर रहे थे। उन्होंने उन व्यापार समझौतों के खिलाफ जमकर बात की जिन्हें उन्होंने "अनुचित" करार दिया और टैरिफ के माध्यम से अमेरिकी उद्योग की रक्षा करने का संकल्प लिया। इसके बाद राष्ट्रपति अपनी लिखी हुई बातों से हट गए। उत्साहित भीड़ के सामने, उन्होंने उपराष्ट्रपति माइक पेंस की ओर इशारा करते हुए कहा, "हम इसे पूरा कर रहे हैं, दोस्तों। और हम इसे लंबे समय तक करते रहेंगे।" उन्होंने आगे कहा, "लेकिन जब समय आएगा... तो माइक से बेहतर आदमी नहीं मिल सकता जो इस मशाल को आगे ले जाए। वह मेरा आदमी है।"

हालांकि यह एक औपचारिक घोषणा नहीं थी, लेकिन उत्तराधिकारी पर विचार किए जाने का यह संकेत तुरंत ही हलचल का कारण बन गया। व्हाइट हाउस का प्रेस कार्यालय सवालों से घिर गया और उसने एक संक्षिप्त बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति को "उपराष्ट्रपति पर पूरा भरोसा है" और वह केवल "उनकी वफादारी और प्रभावशीलता की प्रशंसा कर रहे थे।"

हालांकि, इस टिप्पणी ने व्यापक अटकलों को हवा दी है। राजनीतिक विश्लेषक इस घोषणा के समय पर सवाल उठा रहे हैं, जो ऐसे समय में आया है जब प्रशासन प्रमुख सहयोगियों और चीन जैसे आर्थिक प्रतिद्वंद्वियों के साथ व्यापार विवाद शुरू करने के लिए वैश्विक स्तर पर आलोचना का सामना कर रहा है। कुछ टिप्पणीकारों का सुझाव है कि यह कदम एक संभावित टैरिफ युद्ध के कारण बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता से ध्यान भटकाने की एक रणनीति हो सकती है।

संवैधानिक विद्वानों ने तुरंत बताया कि एक पदस्थ राष्ट्रपति के पास उत्तराधिकारी का नाम "घोषित" करने की कोई शक्ति नहीं होती है, क्योंकि यह पद सार्वजनिक चुनाव द्वारा निर्धारित होता है। आलोचकों और डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस पल को भुनाते हुए इसे एक अप्रत्याशित और अराजक प्रशासन का और सबूत बताया जो लोकतांत्रिक मानदंडों की अवहेलना करता है। एक वरिष्ठ डेमोक्रेटिक कांग्रेसी ने कहा, "अमेरिकी लोग राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं, न कि वह व्यक्ति जो वर्तमान में पद पर है। यह बहुत परेशान करने वाला है।"

इस बीच, रिपब्लिकन पार्टी के भीतर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली थीं, जो शांत भ्रम से लेकर राष्ट्रपति की अपरंपरागत शैली के कट्टर बचाव तक थीं। फिलहाल, वॉशिंगटन राजनीतिक नतीजों से जूझ रहा है, क्योंकि देश यह सोच रहा है कि राष्ट्रपति को अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही उत्तराधिकारी के बारे में बात करने के लिए किस बात ने प्रेरित किया। यह घटना एक ऐसे राष्ट्रपति पद में अप्रत्याशितता की एक और परत जोड़ती है जो पहले से ही परंपरा से हटकर काम करने के लिए जाना जाता है। - UNA

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अमेरिका की एक फ़ेडरल अपील अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टील और एल्युमिनियम आयात पर लगाए गए टैरिफ के मामले में अपनी संवैधानिक और कानूनी सीमाओं को लांघा। अदालत के इस आदेश ने अरबों डॉलर के टैक्स पर कानूनी अनिश्चितता खड़ी कर दी है, जो अब तक लागू हैं। अदालत के 2-1 के फैसले में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन ने नेशनल सिक्योरिटी लॉ का हवाला देकर 2018 में टैरिफ विस्तार का कदम उठाया था, लेकिन यह कार्रवाई कांग्रेस द्वारा तय की गई समय-सीमा से बाहर थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने ट्रेड एक्सपैंशन एक्ट 1962 की धारा 232 के तहत निर्धारित समयसीमा का उल्लंघन किया, जिसके आधार पर इन टैरिफ को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से जोड़कर उचित ठहराया गया था। यह निर्णय न केवल ट्रंप प्रशासन की नीति पर सवाल खड़ा करता है बल्कि अमेरिका की व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी व्यापक असर डाल सकता है। अब सवाल यह है कि अरबों डॉलर के इन टैरिफ का भविष्य क्या होगा और क्या मौजूदा प्रशासन को इन्हें रद्द करना पड़ेगा।