वॉशिंगटन डी.सी., (UNA) : ट्रेज़री सचिव Scott Bessent ने हाल ही में अमेरिका की H-1B वीज़ा कार्यक्रम को लेकर नए दृष्टिकोण का खुलासा किया है, जो राष्ट्रपति Donald Trump की “पहले अमेरिका” नीति के अंतर्गत आता है। Bessent ने कहा है कि अब इस वीज़ा का मकसद केवल विदेशी कुशल श्रमिकों को लाना नहीं, बल्कि उन्हें ‘अमेरिकी कामगारों को प्रशिक्षित करना’ है, उसके बाद उन्हें वापस लौटने का कहा गया है: “पहले अमेरिकी कामगारों को प्रशिक्षित करें, फिर जाएँ, तब अमेरिकी पूरी तरह संभालें।”
उन्होंने बताया कि पिछले दो–तीन दशकों में अमेरिका ने मैन्युफैक्चरिंग, शिपबिल्डिंग और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण उद्योगों में भारी आउटसोर्सिंग की है, और इस नीति का उद्देश्य इन क्षितिजों को देश के भीतर फिर से ожिवित करना है। Bessent ने कहा कि जब तक अमेरिकी कामगारों के पास यह क्षमताएँ नहीं होंगी, वे “उस नौकरी को नहीं ले सकते” — इसीलिए प्रशिक्षण की भूमिका अहम होगी।
इस दृष्टिकोण को अमेरिकी उद्योग तथा प्रवासी-नीति विशेषज्ञ दोनों ने ध्यान से देखा है। समर्थन में यह कहा गया कि नीति अमेरिकी श्रम-शक्ति को सशक्त करेगी। लेकिन आलोचक इसे विदेशी वीज़ाधारी श्रमिकों के भारत व अन्य देशों से आने-जाने को नई चुनौती मान रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि कैसे इस नीति को औपचारिक नियमों, कॉर्पोरेट-हायरिंग प्रथाओं और वैश्विक प्रतिभा-बलancing के बीच व्यवहार में लागू किया जाएगा।
अब यह विषय है कि तकनीक-कम्पनियाँ, शिक्षा-संस्थान व अमेरिका-भारत संबंध इसे कैसे प्रतिक्रिया देंगे, क्योंकि भारत ह-1B वीज़ाधारी श्रमिकों का प्रमुख स्रोत रहा है। - UNA
13 Nov 25“पहले अमेरिकी कामगारों को प्रशिक्षित करें, फिर लौट जाएँ” – Scott Bessent ने Donald Trump के H-1B वीज़ा सुधार की रूप-रेखा साझा की
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