वॉशिंगटन (UNA) : पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर अमेरिका में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कई अमेरिकी सांसदों ने इन शुल्कों को न केवल अवैध बताया, बल्कि यह भी कहा कि इनसे देश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा है। सांसदों के अनुसार, टैरिफ का बोझ सीधे तौर पर अमेरिकी कामगारों और उपभोक्ताओं पर पड़ा, क्योंकि आयातित वस्तुएं महंगी हुईं और उत्पादन लागत बढ़ी।
कानून निर्माताओं ने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह की व्यापार नीतियां अमेरिका और भारत जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंधों को कमजोर कर सकती हैं। उनका कहना है कि सहयोग और मुक्त व्यापार के बजाय संरक्षणवादी कदम दोनों देशों के बीच भरोसे को प्रभावित करते हैं।
सांसदों का मानना है कि भविष्य की व्यापार नीति पारदर्शी, नियम-आधारित और सहयोग पर केंद्रित होनी चाहिए, ताकि घरेलू उद्योगों की रक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को भी मजबूती मिल सके। इस मुद्दे पर आगे राजनीतिक और कानूनी चर्चा जारी रहने की संभावना है। - UNA
















