नई दिल्ली (UNA) : उत्तर भारत में नवंबर महीने के दौरान वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया, जिसके कारण अस्थमा और सीओपीडी जैसी गंभीर सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। डॉक्टरों और फार्मा विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते मरीजों के चलते इन दवाइयों की बिक्री पिछले तीन वर्षों के मुकाबले सबसे अधिक दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में बना रहा, जिससे सांस लेने में कठिनाई, खांसी, सीने में जकड़न और एलर्जी जैसे लक्षण बढ़े। अस्पतालों में ओपीडी संख्या भी सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही।
फार्मासिस्टों ने बताया कि इनहेलर, नेब्युलाइज़र दवाओं और स्टेरॉइड आधारित मेडिकेशन की मांग में अचानक बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर प्रदूषण और तापमान में गिरावट का संयोजन इस संकट को और गंभीर बना रहा है, जिससे आगामी हफ्तों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है। - UNA
















