17 अप्रैल 2025 (UNA) : अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध एक बार फिर तेज़ होता नजर आ रहा है, और इसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर देखने को मिल रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल ने कहा है कि मौजूदा टैरिफ विवादों ने महंगाई नियंत्रण की प्रक्रिया को और मुश्किल बना दिया है, और अब अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए “कठिन फैसलों” का सामना करना पड़ सकता है।
इस बीच, चीन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने 'रेयर अर्थ मिनरल्स' (दुर्लभ खनिजों) के निर्यात पर और सख्ती कर दी है। ये खनिज वैश्विक तकनीकी उत्पादन—जैसे कि स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहनों और सैन्य उपकरणों—के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। चीन की यह रणनीति अमेरिका पर दबाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
जहां एक ओर अमेरिका की ओर से टैरिफ और प्रतिबंधों में तेजी देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर चीन भी अब नरमी के बजाय रणनीतिक हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। इस व्यापार युद्ध के कारण शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है और निवेशकों में चिंता का माहौल है।
जेरोम पावेल ने साफ कहा कि ऐसे हालात में फेड के लिए ब्याज दरों को संतुलित रखना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना एक जटिल चुनौती बन चुका है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बाजार पहले से ही अस्थिरता से जूझ रहे हैं।
संक्षेप में कहें तो, अमेरिका-चीन टैरिफ जंग अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रही—यह महंगाई, तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन को भी अपनी चपेट में ले रही है। - UNA
















