वॉशिंगटन (UNA) : संयुक्त राष्ट्र की राजधानी वॉशिंगटन में एक पॉलिंग विशेषज्ञ ने बयान दिया है कि अमेरिका में H-1B वीज़ा प्रणाली को “डि-इंडियनाइज़” करना चाहिए और उन्होंने हर एक H-1B वीज़ा को दस अवैध आप्रवासियों के बराबर बताते हुए कट्टर नीतिगत सुझाव दिया है। उनका कहना है कि वर्तमान प्रणाली जिन कंपनियों को तकनीकी वीज़ा उपलब्ध कराती है, वह अवैध रोजगार व्यवहार को बढ़ावा दे रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु जोखिम पैदा कर सकती है।
उन्होंने जोर दिया कि विदेशी श्रमिकों की जगह अमेरिकी नागरिकों को रोजगार के अवसर मिलना चाहिए और इससे तकनीकी क्षेत्र में घरेलू प्रतिभा को बढ़ावा मिलेगा। इस बयान ने सोशल और राजनीतिक मंचों पर तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है, जहाँ समर्थक इसे ‘देशभक्ति’ के दृष्टिकोण से देखते हैं, जबकि आलोचक इसे असंवैधानिक तथा विभाजित करने वाली नीति बताते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि H-1B वीज़ा एक तकनीकी श्रमिकों के लिए कानूनी अनुमति प्रणाली है और इसके प्रतिस्थापन से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर प्रभाव पड़ सकता है। - UNA
















