गेहूं-चावल की बदलती अर्थव्यवस्था में किसान कैसे ढाल रहे हैं खुद को01 Dec 25

गेहूं-चावल की बदलती अर्थव्यवस्था में किसान कैसे ढाल रहे हैं खुद को

लखनऊ, उत्तर प्रदेश (UNA) : देश भर में किसान इस समय ‘सुनहरे अनाज’—यानी गेहूं और चावल—के उत्पादन को लेकर नई चुनौतियों और अवसरों से जूझ रहे हैं। मौसम के पैटर्न में लगातार बदलाव, इनपुट लागत में तेजी और बाज़ार की अनिश्चितता ने किसानों के लिए खेती का संतुलन साधना कठिन बना दिया है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में असामान्य वृद्धि और अनियमित वर्षा ने फसलों की पैदावार पर सीधा असर डाला है। इसके चलते कई किसान बेहतर किस्मों, आधुनिक सिंचाई तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह का सहारा लेकर उत्पादन सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।

बाज़ार में दाम उतार-चढ़ाव के बावजूद किसान उम्मीद कर रहे हैं कि समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद कार्यक्रम उन्हें राहत देंगे। वहीं, किसानों का एक बड़ा वर्ग अब वैकल्पिक फसलों और मूल्य-आधारित खेती की ओर भी रुख कर रहा है।

कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में जलवायु अनुकूलन, तकनीकी निवेश और स्थायी खेती मॉडल ही किसानों की असली ढाल साबित होंगे। - UNA

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